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प्रश्नोत्तर P12-0140 · भाग 12

(माता जी) महात्मा के दर्शन घर में हो रहे हैं — ये भी तो हमारा भाग्य है, ये तो मालिक की प्रेरणा से हुआ है।

एकदम, आपके कर्मों का ही फल है, लेकिन बस इस भाग्य को सौभाग्य में बदलो। मिल तो गया, लेकिन आप उसका सदुपयोग कर लो, क्योंकि वो कह रहा है धारण कर लो। एक भ्रम तो टूटा कि हमने गुरु धारण कर लिया — कुछ तो आपने इसके लिए कर्म किया था कि दरवाजे पर आकर बोला जा रहा है कि गुरु धारण कर ले; गुरु कोई शरीर नहीं, गुरु ज्ञान का प्रतीक है, जब उस ज्ञान में तू जिएगा तो तूने गुरु को धारण कर लिया। कुछ भी हमें मिलता है, हमारे कर्मों से ही मिलता है; लेकिन मैं उसका उपयोग किस तरीके से करता हूं, यह मेरे ऊपर है — उसका उपयोग करके गिर भी सकता हूं, उठ भी सकता हूं। कृष्ण के द्वारा बहुत लोगों का कल्याण हुआ, बहुत लोगों का पतन भी हुआ; कृष्ण का दर्शन अर्जुन ने किया तो दुर्योधन ने भी किया — कृष्ण दुर्योधन के दरवाजे पर समझाने गए। एक ने अपना आत्म-कल्याण कर लिया, दूसरे ने पतन कर लिया। राम के बताए मार्ग पर चलकर बहुत भक्तों का कल्याण हुआ, लेकिन दर्शन तो रावण को भी दिया, रावण के दरवाजे तक गए। तो दर्शन मेरे कर्मों का परिणाम है, लेकिन दर्शन के बाद जिसका मैं दर्शन कर रहा हूं, क्या उसका सदुपयोग कर पा रहा हूं — तब दर्शन का मतलब है। गुरु धारण करने के लिए अनपढ़ या पढ़ा-लिखा होने की जरूरत नहीं; ईमानदारी और सत्कर्म के लिए कौन सी पढ़ाई की जरूरत है? अनपढ़ कहकर पीछा मत छुड़ाओ — प्रत्यक्ष में जीना सीखो; ईमानदारी अपना लो, सत्कर्म अपना लो, अपना आत्मिक कल्याण करो।

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वीडियो: किसी भी कारण से पीछा नहीं छूटेगा । #योगी · 2026-08-30