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प्रश्नोत्तर P12-0094 · भाग 12

मनुष्य में जितने भी अवगुण हैं, सबके परिणाम अलग-अलग मिलते हैं या एक समान?

अवगुण तो उसने धारण किया है ना; जैसा कर्म, वैसा अवगुण — एक समान नहीं हैं। गुण और अवगुण दोनों अलग-अलग हैं, क्योंकि उन्हें धारण किया गया है, लेकिन धारण करने वाला एक ही है। गुण-अवगुण को छोड़ दो तो सब एक जैसे हैं। जैसे शाम को लाइटें जल जाती हैं — सबका कलर अलग, उजाला अलग; जैसा बल्ब, वैसा उजाला; लेकिन बल्ब हटा दो तो पीछे ऊर्जा एक ही है। वैसे ही सबका स्रोत एक है; जैसा गुणधर्म धारण किया, वैसा वे बन बैठे। हमें दोनों को छोड़ना है — गुण को भी, अवगुण को भी।

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 4 जनवरी 2026 #योगी · 2026-01-04