प्रश्नोत्तर P12-0048 · भाग 12
क्या काया, वेदना, चित्त और धर्म के अनुसार चिंतन करना सही है?
चिंतन अपने आप होता है। अगर आपने अपने आप को कह दिया कि मुझे बस इस भवसागर से — राग-द्वेष, मोह, आसक्ति, इच्छा, अपेक्षा, मेरा और कर्ता के भाव से — मुक्त होना है, तो उस पर चिंतन होने लगेगा; चिंतन करना नहीं पड़ेगा। जब आप तैयार हो जाओगे, चिंतन होने लगेगा। जैसे शाम को अपने आप को बोल दो कि कल सुबह जाना है, तो तैयारी शाम से ही होने लगती है। लेकिन अगर आपने अपने आप को बोला नहीं, या किसी ने बोला और आपने स्वीकार नहीं किया, तो तैयारी नहीं होगी।
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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 4 जनवरी 2026 #योगी · 2026-01-04