प्रश्नोत्तर P12-0040 · भाग 12
क्या मेरी समझ या मेरा भाव ही ऊर्जा पैदा कर सकता है?
आपकी समझ, आपका भाव — ऊर्जा उसमें है; मूल ऊर्जा सात्विक है, वह आप में भी है। लेकिन जब आपको कुछ चाहिए, तो वहां से पॉजिटिव-नेगेटिव ऊर्जा बनती है। जैसी आपकी समझ रहेगी, सामने वाले से वैसी ऊर्जा आपको मिलेगी। हीरे की पहचान नहीं है तो एक बोरा हीरा भी सामने फेंक दिया जाए, लालच जागृत नहीं होगा; बगल में सोना हो, जिसकी जानकारी है, तो उसे देखकर लालच पैदा हो जाएगा। भाव समझ से बनता है; अगर आपको पता नहीं है तो भाव बनेगा ही नहीं — बनाना चाहोगे तो भी नहीं बनेगा। जैसी जानकारी मिलेगी, वैसी ऊर्जा उसके प्रति बनने लगेगी। और आप कोई समझ तब स्वीकार करोगे जब सामने वाले को योग्य समझोगे; ऐसा नहीं कि कोई कुछ भी बता देगा और आप मान लोगे।
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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 4 जनवरी 2026 #योगी · 2026-01-04