प्रश्नोत्तर P12-0006 · भाग 12
अगर हम गुरु के पास रह रहे हैं और पढ़ते-पढ़ते किसी चीज से खेलने लग जाएं, तो उसके सानिध्य में तो भटकने के चांस कम हो जाते होंगे ना? गुरु हमारी कमी क्यों नहीं बताता?
उसके सानिध्य में आप हो, तो कभी-कभी गुरु आप में कमी देखता है, लेकिन बता नहीं पाता। क्यों? क्योंकि अभी आप रुके हो; हो सकता है वह कमी बताए और आप भाग जाओ। तो वह लक्षण देखता है, फिर भी बताता नहीं, समय का इंतजार करता है — कम से कम रुका तो है, रुका है तो कुछ सीख रहा है; इसको कमी बता दूं तो सीधा भाग जाएगा। गुरु कभी-कभी आपकी कमी देखता है, लेकिन मजबूर है, बता नहीं सकता, क्योंकि सब चला जाएगा। उसकी यही तसल्ली रहती है कि कम से कम सही जगह तो रुका है, कभी ना कभी इसकी क्षमता हो जाएगी; लेकिन यहां से भाग गया तो इसका पतन हो जाएगा, सब कुछ खो देगा। यहां है, तो कम से कम इसकी क्षमता बढ़ ही रही है। अगर उसकी सुनने की क्षमता है और वह अपने आप को पूरा सुधार लेगा, तब तो गुरु बता ही देगा; पर गुरु 100 में 101% देखता है कि यह नहीं सुन पाएगा, और सुन लेगा तो चला जाएगा, क्योंकि इसे यह कमी लग ही नहीं रही है।
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वीडियो: जो कहता हूं वह बस करता रह #योगी · 2026-10-17