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प्रश्नोत्तर P11-0170 · भाग 11

यहां रुकता हूं तो 8-9 दिन में ठीक हो जाता हूं, पर वहां पहुंचकर फिर वही दिक्कत। मैं सोच रहा हूं सब समेट के यहीं आ जाऊं।

अपने लक्ष्य के प्रति लगे रहो, बस। सारे ऑप्शन देख लिए, अब यह आखिरी है। वापस गए तो क्या मिलेगा — जिससे निकले थे वही घुटन, और बहुत तेजी से जाओगे; जैसे परिवार के सदस्य दूर रहकर पास आते हैं तो खूब गले मिलते हैं, जितना आगे आए हो उतनी तेजी से उसमें जाओगे। तो ऐसी गलती ना करना; मुड़ना मत। पता नहीं कितनी सदियों के बाद समझ विकसित हुई है। मुझे तो बताने वाले भी नहीं मिलते थे, फिर भी मैं पीछे नहीं गया — पीछे वही दलदल है। चाहे एक साल में हो, चाहे पूरी जिंदगी लग जाए — दिन, महीना, साल मत गिनना। यह गलती की संभावना तब तक रहती है जब तक पहुंचे नहीं, क्योंकि पीछे परिचित लोग पुकार रहे हैं; लौटाने वाले भी मिलेंगे जो कहेंगे जन्मों-जन्म लगते हैं, यह अवतारों को होता है। मेरी व्यक्तिगत सलाह है — दुनिया में जहां भी रहना, अपने आत्मिक कल्याण के लिए काम करना, कभी लौटना मत।

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वीडियो: 11 जनवरी 2026 रविवार प्रश्नोत्तरी #योगी · 2026-01-11