प्रश्नोत्तर P11-0026 · भाग 11
(कुटिया में साधक) मैंने एक साथी साधक को सलाह दी थी कि आंख थोड़ा बंद करके बैठा करो, ताकि बाहर से रसपान कम हो। क्या यह गलत था?
आपको सिर्फ अधिकार मिला है अपने लिए, कि अपना कल्याण कैसे कर लो। जैसे ही तुम किसी और में लगे — आंख बंद करो, खोलो, ऐसी मुद्रा में बैठो — आप फंस गए, आपकी यात्रा वहीं रुक गई। मान लीजिए आप कार से जा रहे हैं और एक साइकिल वाला हैंडल छोड़ के चला रहा है; आपने तुरंत कार रोकी — स्पीड किसकी कम हुई? आपकी। बात कहने के लिए उसे भी रोकना पड़ेगा; अब दोनों रुक गए। और उसने कह दिया — तू कौन है रे, ज्यादा ज्ञान मत ठोक; तो समय भी गया, एनर्जी भी गई, और आप मायूस होकर चल दिए, जिस तेजी से जा रहे थे वह भी गई। इसलिए लक्ष्य तक बिना पहुंचे किसी से बात ना करो। जीवंत गुरु के अलावा किसी से सलाह लिया या दिया — दोनों स्थिति में आपकी स्पीड कम हो जाएगी, हो सकता है यात्रा ही छूट जाए। जीवंत गुरु लक्ष्य पे है; उससे बात करोगे तो वह कहेगा और तेज कर। तो जीवन में याद रखो — ना सलाह दो, ना लो।
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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 22 फरवरी 2026 #योगी · 2026-02-22