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प्रश्नोत्तर P11-0007 · भाग 11

(कुटिया में साधक) सात दिन बाद मैं अपने संसार में चला जाऊंगा। वहां रहकर साधना करूं, तो मुझे कैसे पता चलेगा कि मेरी स्थिति कहां तक पहुंची है?

जब आप जाओगे, तो हर तरह के लोग मिलेंगे, हर तरह की बातें होंगी — कोई आपके तरीके से बात करेगा, कोई आपके विरोध में। उसी समय आपकी स्थिति का आपको पता चलेगा। अंदर से प्रतिक्रिया उठेगी, लेकिन बाहर से मत देना — यह याद रखना। अंदर से प्रतिक्रिया आखिरी तक उठती है, जब तक अवधूत स्थिति नहीं होती, जब तक "चाहिए" में रहोगे। अवधूत स्थिति हो जाती है तो बाहर से भी और अंदर से भी प्रतिक्रिया उठना खत्म हो जाता है। बस एक ही काम करना — अपनी आत्मरक्षा करते हुए, वह प्रतिक्रिया जिससे आप गिरते हो, बाहर से देना बंद कर देना। जैसे आदमी नशा करते हुए पैदा नहीं हुआ; बाद में किया। समझ आया तो छोड़ दिया, अब उसकी याद सताती है, पीड़ा होती है; लेकिन जब वह शरीर से नहीं करता, तो एक समय आता है कि मानसिक भी छूट जाता है। तो जितनी भी गंदी आदतें हैं, समाज में जाकर मत करना; अपने आप को समझा लेना कि मुझे निकलना है, मुझे ईमानदारी से जीना है।

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 22 फरवरी 2026 #योगी · 2026-02-22