प्रश्नोत्तर P1-0198 · भाग 1
गाड़ी में तो मुझे आभास हो गया था कि अब पलटेगी और जान का खतरा है। लेकिन संसार में रहते हुए यह कैसे महसूस करूं कि अब बस करो? जीवात्मा का स्वभाव ऐसा है कि हम आखिरी क्षण तक अपना ही नाश करते रहते हैं, छोड़ना जैसे सीखा ही नहीं।
जब तक ताकत खत्म नहीं हो जाएगी, तब तक वह अपने आप को फंसाता रहेगा, किसी की बात नहीं मानेगा।
मानवता के नाते — अगर किसी की गाड़ी फंस गई और आप देख रहे हो कि वह निकाल रहा है, और आपको लग रहा है कि नहीं निकल पाएगी, तो एक बार बोल दो। कम से कम उसे यह तो पता चलेगा; और फंस जाएगा तो बोलेगा, काश पहले उसकी बात मान ली होती। तो मानवता के नाते हमारे सामने कोई फंस रहा है तो हमें बोल देना चाहिए।
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वीडियो: उद्धार के लिए क्या करें ? #योगी · 2026-09-29