प्रश्नोत्तर P1-0032 · भाग 1
गुरु जी, आज तो आप दुर्वासा ऋषि हो गए (बहुत क्रोध में बोले)।
बनना पड़ेगा ना। जब लोग मिलावटी बातें करेंगे, तो बनना पड़ेगा। तपस्या करके यहां तक आए हैं; घास छीलकर नहीं आए कि गेरुआ पहन लिया और किसी संप्रदाय के सहारे यहां तक आ गया। अपने बलबूते पर यहां आया हूं। आज मैंने प्रत्यक्ष ज्ञान पाया है और लोगों को प्रत्यक्ष ज्ञान दे रहा हूं, तो इसके लिए मैंने मेहनत की है। किसी संप्रदाय के द्वारा खड़ा नहीं हुआ, कोई बैक सपोर्ट नहीं मिला; संघर्ष करके यहां तक आया हूं। प्रत्यक्ष बोलता हूं, तो प्रत्यक्ष में मेरा जीवन है।
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