प्रश्नोत्तर P1-0030 · भाग 1
संत जी, मेरे मन के विकार नष्ट नहीं हो रहे, मैं परेशान हो गया हूं। मन निर्मल हो जाए, इसके लिए क्या करूं?
मन गंदे कर्मों से भरा है ना, तो निर्मल होने के लिए कर्म करो। ऐसे नहीं हो जाएगा कि दुष्कर्म-कुकर्म करके हमने अपने आप को अपवित्र कर लिया, अब कुछ ऐसा उपाय बताओ कि हम निर्मल हो जाएं। निर्मल होने के लिए काम करना पड़ेगा। हम अपवित्र हुए हैं तो हमने अनेकों के दिल दुखाए हैं, अनेकों को लूटा है, बेईमानी की है, सताया है — तब आज घुटन में हैं। तो आप जरूरतमंद की सेवा करो; उसकी अंतरात्मा से आशीर्वाद निकलेगा, तब जाकर कल्याण संभव है।
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